शीतकाल के लिए बंद हुए तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट

तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बुधवार की दोपहर करीब 11.30 बजे बंद कर दिए गए। इस मौके पर मंदिर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। 

कपाट बंद करने के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु तुंगनाथ मंदिर पहुंचे। सुबह से ही कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पूजा अर्चना, श्रृंगार, मंदिर में भोग लगने के पश्चात स्वयंभू शिवलिंग को समाधि दी गई। इसके पश्चात तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए।इसके बाद अगले छह माह भगवान तुंगनाथ अपने शीतकालीन प्रवास मक्कूमठ में भक्तों को दर्शन देंगे। 

पर्यटकों के लिए बंद हुई विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी

विश्व धरोहर फूलों की घाटी बृहस्पतिवार से पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद हो गई। पर्यटकों को सैर-सपाटे के लिए घांघरिया तक जाने के लिए भी जोशीमठ और गोविंदघाट में नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ेगी।

शीतकाल में अत्यधिक बर्फबारी होने से फूलों की घाटी आवाजाही के लिए बंद हो जाती है। इस वर्ष फूलों की घाटी के दीदार को रिकॉर्ड तीर्थयात्री उमड़े। फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों के लिए खुली थी। चार माह तक पर्यटक यहां सैर-सपाटे के लिए पहुंचते हैं। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती का कहना है कि बृहस्पतिवार को फूलों की घाटी आम पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद कर दी गई है। इस वर्ष 17424 पर्यटकों ने फूलों की घाटी के दीदार किए। इसमें 16904 भारतीय व 520 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। पर्यटकों की आवाजाही से पार्क प्रशासन को 27 लाख 60 हजार 825 रुपये की आय प्राप्त हुई है। 

फूलों की घाटी एक राष्ट्रीय उद्यान है जो कि गढ़वाल क्षेत्र के चमोली जिले में स्थित है। इसे विश्व की धरोहर घोषित किया गया है। फूलों की घाटी 87.50 किमी वर्ग क्षेत्र में फैली है। इसे यूनेस्को ने 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया था। हिमाच्छादित पर्वतों से घिरी हुई यह घाटी बेहद खूबसूरत है। यह क्षेत्र बागवानी विशेषज्ञों और फूल प्रेमियों के लिए बेहद फेमस है।

शीतकाल के लिए हुए बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद

उच्च हिमालय में विराजमान विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। पौराणिक परंपराओं के अनुसार भैयादूज के मौके पर सुबह साढ़े आठ बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के छह महीनो के लिए बंद हुए। अब आने वाले शीतकाल के छह महीनो तक पंचकेदारो की गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भक्त भोले बाबा के दर्शन कर सकेंगे। केदारनाथ धाम में कपाट बंद होने के मौके पर डेढ़ हजार से अधिक श्रद्धालु इस शुभ अवसर के साक्षी बनें।केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया गत दिवस से ही शुरू हो गई थी। उत्सव डोली को मंदिर में रखा गया था। मंगलवार सुबह तीन बजे से ही समाधि पूजा शुरू कर दी गई थी। लगभग दो घंटे तक पूजा की गई। मुख्य पुजारी, वेदपाठियों ने पूजाएं संपन्न कराई। इसके बाद भोले बाबा की पंचमुखी मूर्ति को उत्सव डोली को मंदिर के अंदर स्वयं भू लिंग वाले गर्भ गृह से ठीक सुबह 6.30 पर बाहर लाया गया। साथ ही गर्भ गृह के कपाट बंद कर दिए गए।  इसके पश्चात उसत्सव डोली को भक्तो के दर्शनार्थ गर्भ गृह के बाहर में रखा गया। ठीक आठ बजकर 30 मिनट पर उत्सव डोली को मंदिर से बाहर लाने के बाद केदारनाथ मंदिर के मुख्य कपाट बंद कर दिए गए। इस मौके पर यहां मौजूद भक्तो के जयकारों से पूरी केदारपुरी भक्तमय हो गई। जम्मू-कश्मीर आर्मी की बैंड टीम की धुनों ने भी माहौल को भक्तिमय बना दिया। मंदिर से उत्सव डोली के बाहर आने के बाद मंदिर की परिक्रमा की गई। साथ ही डोली सीधे अपने गद्दीस्थल के लिए रवाना हो गई। 30 अक्टूबर को केदारनाथ की उत्सव डोली रामपुर से प्रस्थान कर फाटा, नारायणकोटी होते हुए रात्रि विश्राम के लिए विश्वनाथ मन्दिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 31 अक्टूबर को केदारनाथ की उत्सव डोली गुप्तकाशी से प्रस्थान कर लगभग सुबह ठीक 11 बजे पंचकेदार गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में प्रवेश करेगी। जहां डोली का फूल व अक्षतों से जोरदार स्वागत होगा। वहीं, डोली को ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान किया जाएगा। इसके बाद से शीतकाल में बाबा केदारनाथ की पूजा इसी मंदिर में होगी। 

HOW TO REACH DEHRADUN

In order to see the various tourist attractions in Dehradun, you have to reach here first and don’t worry getting there won’t be a hassle at all as this destination is well connected to major cities of the country by air, rail, and road for a prosperous journey.

By AIR

The domesticairport of Dehradun is Jolly Grant Airport. It connects Dehradun to othercities and towns across India such as Delhi, Bangalore, Hyderabad, Mumbai,Trivandrum, Lucknow and Chennai, via regional airlines such as Air IndiaRegional, IndiGo, Jet Airways, SpiceJet and Ventura AirConnect. Dehradun doesnot have an international airport. So tourists from abroad can reach the cityvia international airports located in metropolitan cities of India such asChennai, Mumbai, Kolkata, etc. These airports have frequent flights to citiesscattered across the world.

Nearest Airport: Jolly Grant Airport is located at a distance of 22 kilometresfrom the city centre.

By BUS

Dehradun is well connected to most cities such as Delhi, Shimla, Haridwar, Rishikesh, Agra and Mussoorie by Volvo, Deluxe, semi-deluxe and Uttarakhand State Transport buses. These buses arrive and depart from the Dehradun Inter State Bus Terminal (ISBT) near Clement Town. Buses depart from here every 15 minutes to one hour. Other bus terminals in Dehradun are the Mussoorie Bus Station, located at the Dehradun Railway Station which has regular bus services to Mussoorie and other nearby cities. Another interstate bus terminal in Dehradun is the Delhi Bus Stand on Gandhi Road.

By Train

Dehradun is connected by regular train services to cities Delhi,Lucknow, Allahabad, Mumbai, Kolkata, Ujjain, Chennai and Varanasi. The DehradunRailway Station is located 1-2 kilometers away from the city centre and shouldtake you only ten minutes, depending on traffic. Dehradun is connected to therest of the country by trains such as the Shatabdi Express, Jan ShatabdiExpress, Dehradun AC Express, Doon Express, Bandra Express and theAmritsar-Dehradun Express among others.

Road/Self Drive

A popular tourist destination, Dehradun has a strong road network, which makes for a pleasant driving experience. Dehradun is well connected by road to cities like Delhi by the NH 58 and 72 is approximately a 4 hour drive. Chandigarh is located at a distance of 167 kilometers and is almost a 3 hours’ drive. Dehradun is also well connected to cities like Haridwar and Rishikesh.

Not sure of best route to Dehradun from your city. Search it on routeplanner-

Kedarkantha Itineary

Day 1 – Dehradun – Sankri (7-8 hrs by road)

  • From Dehradun, drive to Sankri. Mussoorie, Kempty Fall, Nainbag, Purola and Mori will be on route.
  • Stay will in hotel
  • Sankari village can be visited in evening

Day 2 – Sankri – Juda-ka-Talab – Shepherd Camp (3-4 hrs)

  • Trek to Juda ka Talab, after breakfast
  • The trail is of moderate nature and passes through a lovely forest for most of the part.
  • It will take 2-2.5 hours to reach Juda-ka-Talab
  • Tents will be pitched here and overnight stay will be here

Day 3 – Juda ka Talab – Kedarkantha Base (4 hrs)

  • Can witness awesome views of snow clapped peaks in early morning
  • Trek to KedarKantha Base camp, after breakfast.
  • Reach the destination and revel in the open snow ground ringed by trees.
  • Witness the views of Swargarohini, Bandarpoonch and Kalanag peaks
  • Overnight will be spent in tents.

Kedarkantha summit

Day 4 – Base Camp – Kedarkantha – Hargaon

  • Start Trek to Kedarkantha from Base camp and reach Kedarkantha. It takes 4-5 hours to reach kedarkantha
  • Magnificent views of mountains of Yumnotri and Gangotri range, Kinner Kailash range and other ranges in Himachal
  • Head back to the Hargaon.
  • Overnight will be spent in tents.

Day 5 – Hargaon – Sankri

  • After Breakfast trek back to Sankri village.
  • On arrival in Sankri check-in into a hotel and enjoy the day with scenic views all around
  • Overnight stay at the hotel.

Day 6 – Drive from Sankri to Dehradun (6-7 Hours)

  • Post breakfast, Drive back to Dehradun. Trip ends here.

आज से बंद होंगे हेमकुंड साहिब और लोकपाल मंदिर के कपाट

हेमकुंड साहिब के कपाट और लोकपाल मंदिर के कपाट आज अपराह्न डेढ़ बजे शीतकाल के लिए विधि विधान से बंद कर दिए जाएंगे।

गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के वरिष्ठ प्रबंधक ने बताया कि कपाट बंद करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि आज सुबह दस बजे सुखमणी पाठ, अपराह्न ग्यारह बजे सबद कीर्तन, दोपहर साढ़े बारह बजे अरदास के पश्चात विधि विधान के साथ गुरु ग्रंथ साहिब को पंच प्यायों की अगुवाई में सतखंड में विराजमान कर दिया जाएगा।

इसके बाद अपराह्न डेढ बजे धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा में बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। इस वर्ष दो लाख 81 हजार तीर्थयात्रियों ने प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब में मत्था टेका।

Lakshman Jhula bridge in Rishikesh closed down

Ram Jhula Rishikesh, Uttarakhand
Laxman Jhula Rishikesh, Uttarakhand

 Rishikesh’s 90-year-old suspension bridge, Lakshman Jhula, constructed during the British Raj over the Ganga, was closed on Friday as experts feel it can not sustain more load. Built in 1923, the 136-metre bridge on the Ganga is used by pedestrians and two-wheelers.

The Lakshman Jhula is a 136-metre suspension bridge on the Ganga river connecting Tapovan village in Tehri district with Jonk in Pauri district. Built in 1923, it is one of the main attractions for tourists and devotees in Rishikesh. The bridge is used by pedestrians and two-wheelers. It was named after Hindu mythological character Lakshman as it is believed to stand where he is said to have crossed the river with the help of jute ropes.


1 जून से पर्यटकों के लिए खुलेगी फूलों की घाटी

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी एक जून को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए खुल जाएगी। इस बार हुई बर्फबारी से घांघरिया से फूलों की घाटी तक 3 किमी पैदल ट्रेक क्षतिग्रस्त पड़ा है, जिसे 15 मई तक दुरुस्त कर दिया जाएगा।  भारी बर्फबारी की वजह से पैदल रास्ते के साथ ही खीर गंगा और अन्य स्थानों पर बने पैदल पुलों को हानि पहुंची है। इसे देखते हुए पार्क प्रशासन ने 15 अप्रैल से हिमखंडों को काटकर रास्ता बनाने और पैदल पुलों को दुरुस्त करना तय किया है। 

घांघरिया से फूलों की घाटी तक तीन किमी पैदल ट्रेक जगह-जगह क्षतिग्रस्त पड़ा है। यहां एक किलोमीटर पैदल रास्ता करीब चार मीटर तक ध्वस्त पड़ा हुआ है। रास्ते में दो जगहों पर हिमखंड भी टूटे हुए हैं। 15 मई तक ट्रेक को आवाजाही के लिए सुचारु कर दिया जाएगा और एक जून को फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी। 

अंग्रेज पर्यटक ने खोजी थी यह घाटी

फूलों की घाटी की खोज 1931 मे ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेंक एस स्माइथ ने की थी। कामेट पर्वत आरोहण के बाद रास्ता भटककर वे यहां पहुंचे  थे। उन्होंने वैली ऑफ  फ्लावर  नाम की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक प्रकाशित की। 

पिछले साल सीजन के दौरान बेहतर मौसम होने की वजह से फूलों की घाटी में रिकॉर्ड 13500 पर्यटक पहुंचे थे।

 

 

How to prepare for Rupin pass trek

Rupin pass trek
Rupin pass trek

This is a trek that will test anyone’s patience and endurance. It has a mix of different terrains ranging from medium to difficult levels. It also requires you to have a certain level of physical fitness. If you are a person who is not physically fit and mostly leads a sedentary life, then it is advisable to indulge in some form of physical activity like exercises or sports to make yourself fit for the trek.

Legs and calf muscles need to be worked upon especially as they are used the most. People who are not very comfortable with treks at such high altitudes can do some form of yoga as it helps in building mental and physical confidence.

Carrying basic first aid kit with yourself during the trip is also compulsory. Consult your doctor before coming to this trek and ensure that you are medically fit to go for this trek as the trek does have some difficult terrains and climatic conditions.

It is also a must to buy raincoats and umbrellas prior to the trip if you are going during the monsoons. Also, make sure you have sufficient warm garments for the trip and buy them. Do research well everything on the internet or ask friends who have come here to get a proper understanding and information about the place.